12. शांति बाइदेउ : यादों के झरोखे से ✍ डॉ. रीतामणि वैश्य

जीवन से किसी के जाने की पीड़ा का अनुभव उसे ही होता है, जो उस पीड़ा से गुजरा हुआ होता है। मनुष्य दूसरों की पीड़ा का अनुमान लगा सकता है,पर अनुभव तो अपनी पीड़ा का ही कर सकता है। हरेक दिन हम सैकड़ों बार ‘नहीं’ शब्द का प्रयोग करते हैं,पर अपने सगे किसी मनुष्य के संदर्भ में यह ‘नहीं’ शब्द बहुत ही दर्दनाक होता है।  

 

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